पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- यद्यपि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वित्तीय क्षेत्र को दक्षता बढ़ाकर और जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ बनाकर परिवर्तित कर रही है, साथ ही यह रोजगार, नैतिकता एवं प्रणालीगत जोखिमों से संबंधित चिंताएँ भी उत्पन्न करती है।
वित्तीय क्षेत्र में एआई: प्रमुख शोध निष्कर्ष
- अमेरिका की लगभग 60% वित्तीय सेवा कंपनियों ने पहले ही एआई समाधान लागू कर दिए हैं या उनका परीक्षण कर रही हैं (PwC सर्वेक्षण, 2023)।
- वैश्विक एआई वित्त बाजार 2030 तक $64.03 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर 23.7% होगी (फॉर्च्यून बिज़नेस इनसाइट्स, 2024)।
- विश्व आर्थिक मंच (2023) के अनुसार:
- 11 लाख रोजगार वैश्विक स्तर पर समाप्त हो सकते हैं।
- 13 लाख नए रोजगार उत्पन्न हो सकती हैं।
वित्त में एआई के सकारात्मक प्रभाव
- संचालन दक्षता में वृद्धि: एआई-संचालित प्रणालियाँ वास्तविक समय में विशाल वित्तीय डेटा का विश्लेषण करती हैं, जिससे निर्णय लेने की गति और सटीकता बढ़ती है।
- मशीन लर्निंग का उपयोग क्रेडिट स्कोरिंग, पोर्टफोलियो प्रबंधन और एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग में व्यापक रूप से किया जाता है।
- जोखिम प्रबंधन और धोखाधड़ी पहचान में सुधार: एआई-आधारित विश्लेषण वित्तीय जोखिमों और असामान्यताओं की शीघ्र पहचान में सक्षम है।
- बिग डेटा और पैटर्न पहचान का उपयोग करके एआई ने ऑडिट गुणवत्ता एवं धोखाधड़ी पहचान दक्षता में उल्लेखनीय सुधार किया है।
- एसोसिएशन ऑफ सर्टिफाइड फ्रॉड एग्ज़ामिनर्स के अनुसार, एआई-आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणालियों ने धोखाधड़ी हानि को 54% तक कम किया है।
- ग्राहक अनुभव में सुधार: चैटबॉट और वर्चुअल असिस्टेंट (24/7 सहायता), व्यक्तिगत उत्पाद अनुशंसाएँ, ग्राहक संतुष्टि और डेटा-आधारित वित्तीय परामर्श के माध्यम से एआई ग्राहक संवाद को बेहतर बनाता है।
नकारात्मक प्रभाव और चुनौतियाँ
- रोजगार विस्थापन: स्वचालन डेटा प्रविष्टि, बुनियादी वित्तीय विश्लेषण और ग्राहक सेवा जैसी नियमित भूमिकाओं को खतरे में डालता है।
- मैकिन्ज़ी ग्लोबल इंस्टीट्यूट(2022) का अनुमान है कि अमेरिका में 2030 तक 8 लाख तक वित्तीय रोजगार स्वचालित हो सकते हैं।
- नैतिक चिंताएँ और पक्षपात: एआई प्रणालियाँ प्रशिक्षण डेटा से पक्षपात ग्रहण कर सकती हैं, जिससे भेदभावपूर्ण ऋण प्रथाएँ और एल्गोरिथ्मिक अपारदर्शिता उत्पन्न होती है।
- यह निष्पक्षता, जवाबदेही और समावेशिता से संबंधित चिंताएँ उठाता है।
- साइबर सुरक्षा और प्रणालीगत जोखिम: एआई प्रणालियाँ साइबर हमलों, डेटा उल्लंघनों और स्वचालित ट्रेडिंग के माध्यम से बाज़ार हेरफेर के प्रति संवेदनशील हो सकती हैं।
- फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड (FSB) ने बाज़ार अखंडता और उपभोक्ता विश्वास बनाए रखने हेतु सशक्त शासन की आवश्यकता पर बल दिया है।
संबंधित पहल
- नीति आयोग – राष्ट्रीय एआई रणनीति (‘AI फॉर ऑल’): इसमें वित्तीय सेवाओं को प्राथमिक क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है।
- वित्तीय समावेशन, स्मार्ट ऋण प्रणाली, एआई-आधारित धोखाधड़ी पहचान और जिम्मेदार व नैतिक एआई अपनाने को बढ़ावा दिया गया है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) पहल:
- बैंकों को जोखिम प्रबंधन और धोखाधड़ी पहचान हेतु एआई/एमएल अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- RBI इनोवेशन हब एआई मॉडल विकसित कर रहा है ताकि म्यूल अकाउंट्स और डिजिटल धोखाधड़ी का पता लगाया जा सके।
- RBI ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्तरदायी और नैतिक संवर्धन हेतु ढाँचा (FREE-AI) जारी किया है, जो IndiaAI मिशन के अनुरूप है और एआई अपनाने हेतु “7 सूत्र” प्रदान करता है।
- डिजिटल इंडिया एवं फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र:
- एआई का एकीकरण यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), आधार-आधारित KYC, अकाउंट एग्रीगेटर (AA) फ्रेमवर्क के साथ किया गया है।
- इससे तीव्र ऋण पहुँच, पेपरलेस बैंकिंग और डिजिटल भुगतान का विस्तार संभव हुआ है।
आगे की राह
- नवाचार और जिम्मेदारी का संतुलन: एआई वित्तीय क्षेत्र के लिए दोधारी तलवार है।
- यह रोजगार, नैतिकता और सुरक्षा से संबंधित जोखिम उत्पन्न करता है, वहीं दक्षता, सटीकता एवं बेहतर सेवाएँ भी प्रदान करता है।
- पुनः कौशल विकास की आवश्यकता: इस परिवर्तन के लिए सतत् शिक्षण कार्यक्रम, उद्योग-शैक्षणिक साझेदारी और सरकार-प्रेरित कौशल विकास पहल आवश्यक हैं।
- समावेशी विकास सुनिश्चित करने और संरचनात्मक बेरोजगारी को कम करने के लिए यह महत्वपूर्ण है।
- अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (2024–2030) के अनुसार वित्तीय विश्लेषकों और डेटा वैज्ञानिकों के रोजगारों में 16% वृद्धि की संभावना है।
- नीतिगत सिफारिशें:
- पारदर्शी और जवाबदेह एआई प्रणालियाँ सुनिश्चित की जाएँ।
- पक्षपात कम करने हेतु नैतिक एआई ढाँचे को बढ़ावा दिया जाए।
- साइबर सुरक्षा और नियामक निगरानी को सुदृढ़ किया जाए।
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